18/8/25

खंडगिरी और उदयगिरी गुफाएँ – इतिहास की पत्थरों पर उकेरी कहानी



    स्थान: भुवनेश्वर, ओडिशा

    प्रसिद्धि: प्राचीनजैन गुफाएँ, कलात्मक शिल्पकला, ऐतिहासिक महत्व 


परिचय


भारत की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहरों में ओडिशा का विशेष स्थान है। यहाँ स्थितखंडगिरी और उदयगिरी गुफाएँ/ न केवल वास्तुकला का अद्भुत उदाहरण हैं, बल्कि भारत के प्राचीन जैन धर्म और जीवनशैली की झलक भी प्रस्तुत करती हैं। ये गुफाएँ हजारों वर्षों पुरानी हैं और आज भी अपनी अद्भुत नक्काशी और ऐतिहासिक महत्व के कारण पर्यटकों और शोधकर्ताओं को आकर्षित करती हैं।


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  इतिहास की झलक


खंडगिरी और उदयगिरी गुफाओं का निर्माण ईसा पूर्व पहली शताब्दी में किया गया था। इनका निर्माण राजा खारवेल के शासनकाल में हुआ था, जो महामेघवाहन वंश के प्रतापी शासक थे। ये गुफाएँ मुख्यतः जैन संन्यासियों के निवास और ध्यान के लिए बनाई गई थीं।


उदयगिरी में कुल 18 गुफाएँ हैं, जबकि खंडगिरी में 15 गुफाएँ पाई जाती हैं। ये गुफाएँ पत्थरों को काटकर बनाई गई हैं और इन पर की गई नक्काशी से तत्कालीन समाज, संस्कृति, धार्मिक जीवन और कला के बारे में बहुत कुछ पता चलता है।


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उदयगिरी गुफाओं की विशेषताएँ


हाथीगुम्फा गुफा सबसे प्रसिद्ध है। इसमें राजा खारवेल का शिलालेख अंकित है, जो उस समय का एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक दस्तावेज माना जाता है।

यहाँ की गुफाओं में जैन तीर्थंकरों की मूर्तियाँ और चित्रण प्रमुखता से दिखाई देते हैं।

शिल्पकला इतनी बारीकी से की गई है कि हजारों सालों बाद भी वह जीवंत प्रतीत होती है।


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खंडगिरी गुफाओं की विशेषताएँ


खंडगिरी की गुफाएँ अपेक्षाकृत साधारण हैं, लेकिन इनमें धार्मिक महत्व की कई मूर्तियाँ हैं।

यहाँ की दीवारों पर जैन धर्म से जुड़े प्रतीकों और कथाओं की झलक मिलती है।

कुछ गुफाओं में छोटे-छोटे कमरे हैं, जहाँ संन्यासी ध्यान किया करते थे।


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  धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व


खंडगिरी और उदयगिरी गुफाएँ न केवल ऐतिहासिक महत्व रखती हैं, बल्कि आज भी जैन धर्म के अनुयायियों के लिए एक पवित्र तीर्थस्थल हैं। यहाँ प्रति वर्ष अनेक श्रद्धालु आते हैं और इन स्थलों की पूजा करते हैं। इसके साथ ही यह स्थान ओडिशा की सांस्कृतिक समृद्धि का प्रमाण भी हैं।


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    कैसे पहुँचें?


स्थान: ये गुफाएँ ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर से लगभग 6-7 किलोमीटर की दूरी पर स्थित हैं।

नजदीकी रेलवे स्टेशन: भुवनेश्वर रेलवे स्टेशन

हवाई अड्डा: भुवनेश्वर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा


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    यात्रा के लिए सुझाव


सबसे अच्छा समय अक्टूबर से मार्च के बीच होता है।

प्राचीन कला और इतिहास में रुचि रखने वालों के लिए यह स्थान स्वर्ग से कम नहीं।

गाइड की सहायता से आप यहाँ की कहानियों और इतिहास को बेहतर ढंग से समझ सकते हैं।


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  समापन


खंडगिरी और उदयगिरी गुफाएँ सिर्फ पत्थरों की संरचना नहीं हैं, बल्कि ये भारत के प्राचीन इतिहास, कला, धर्म और संस्कृति की जीवित मिसाल हैं। अगर आप कभी ओडिशा जाएँ, तो इन गुफाओं की यात्रा अवश्य करें। यह न सिर्फ आपकी जानकारी बढ़ाएगी, बल्कि आपको भारतीय विरासत पर गर्व करने का एक और कारण देगी।


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17/8/25

पुरी यात्रा गाइड: जगन्नाथ मंदिर, समुद्र तट और ओडिशा की संस्कृति का अनोखा संगम.

✨ परिचय









अगर आप भारत में घूमने के लिए एक ऐसा स्थान ढूंढ रहे हैं जहाँ धार्मिक आस्था, प्राकृतिक सुंदरता और संस्कृति का अनोखा संगम देखने को मिले, तो पुरी (ओडिशा) से बेहतर जगह और कोई नहीं। पुरी को जगन्नाथ धाम भी कहा जाता है और यह हिंदू धर्म के चार धामों में से एक है। यहाँ का समुद्र तट, मंदिर और लोकसंस्कृति हर यात्री के लिए यादगार अनुभव बनाते हैं।


🚆 पुरी तक कैसे पहुँचें (How to Reach Puri)

पुरी तक पहुँचने के लिए कई सुविधाजनक विकल्प हैं:

  • रेल मार्ग: पुरी रेलवे स्टेशन भारत के बड़े शहरों से जुड़ा हुआ है।
  • हवाई मार्ग: नज़दीकी एयरपोर्ट भुवनेश्वर का बीजू पटनायक इंटरनेशनल एयरपोर्ट है।
  • सड़क मार्ग: बस और टैक्सी सेवाएँ आसानी से उपलब्ध हैं।

🏨 पुरी में ठहरने के विकल्प (Stay in Puri)

पुरी में हर बजट के लिए ठहरने की सुविधा उपलब्ध है:

  • बीच रिसॉर्ट्स – समुद्र किनारे ठहरने का अनोखा अनुभव।
  • मंदिर के आसपास धर्मशालाएँ और बजट होटल।
  • लग्ज़री होटल – परिवार और टूरिस्ट्स के लिए आरामदायक विकल्प।

🍲 पुरी का भोजन (Food in Puri)

पुरी की यात्रा अधूरी है अगर आप यहाँ का महाप्रसाद नहीं चखते।

  • जगन्नाथ मंदिर का महाप्रसाद – मिट्टी के बर्तन में पकाया गया सात्विक भोजन।
  • स्थानीय व्यंजन – दालमा, उड़िया थाली और सीफूड।
  • मिठाइयाँ – रसगुल्ला और छेना पोड़ा यहाँ की खासियत हैं।

🌊 पुरी के दर्शनीय स्थल (Places to Visit in Puri)

  1. जगन्नाथ मंदिर – 12वीं शताब्दी का ऐतिहासिक मंदिर।
    Jagannath Temple













  2. पुरी बीच – सुबह का सूर्योदय और शाम का सूर्यास्त देखने लायक। 
                                                                                                          























कोणार्क सूर्य मंदिर – यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साइट 














3. चिलिका झील – बर्ड वॉचिंग और बोट राइड के लिए प्रसिद्ध। 
4. नंदनकानन जूलॉजिकल पार्क – परिवारों और बच्चों के लिए खास।
5. खांडगिरी और उदयगिरी गुफाएँ – इतिहास और शांति का अनुभव।

🎉 पुरी का रथ यात्रा महोत्सव

पुरी का रथ यात्रा उत्सव विश्व प्रसिद्ध है। लाखों श्रद्धालु भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की यात्रा देखने आते हैं। यह त्योहार पुरी की संस्कृति और आध्यात्मिकता का सबसे बड़ा आकर्षण है।








📝 निष्कर्ष (Conclusion)

पुरी केवल एक धार्मिक स्थल ही नहीं, बल्कि यह संस्कृति, इतिहास और प्राकृतिक सुंदरता का संगम है। चाहे आप अध्यात्म की तलाश में हों या छुट्टियों का आनंद लेना चाहते हों, पुरी हर यात्री को अविस्मरणीय यादें देता है।

31/3/21

इमरजेंसी फंड

 रोटी कपड़ा और मकान के बाद आज सबसे ज्यादा जरूरी है, कि हम अपने तथा परिवार के लिए एक इमरजेंसी फंड की व्यवस्था करके रखें। आपको यह इमरजेंसी फंड न केवल आपको आर्थिक स्वतंत्रता दिलाएगा बल्कि भविष्य की आर्थिक अनिश्चितता तथा अस्थिरता को भी कम करने में आपकी मदद करेगा। अब यह सवाल उठता है कि हमारा इमरजेंसी फंड कितना होना चाहिए, तो सामान्सत़ः आज के समय में जो स्थिति है उसके हिसाब से आपके मासिक आय का 5 से 7 गुना आपके पास इमरजेंसी फंड के रूप में होना चाहिए और यह इमरजेंसी फंड आप की बचत खाता से अलग होना चाहिए। यह इमरजेंसी फंड आपको उस समय काम आएगा जब अचानक आपकी आए किसी भी कारणवश बंद हो जाए तो आपको आर्थिक झटकों से उबरने में मदद करेगा। आप इसकी शुरुआत कैसे करें आप अचानक से पैसा नहीं बचा पाएंगे इसके लिए आप धीरे-धीरे शुरुआत कर सकते हैं। शुरुआत में आपको दिक्कत आएगी लेकिन आप यह निश्चित कर ले कि आपको अपने मासिक आय का कम से कम 5 से 10 प्रतिशत हिस्से को बचत करने की कोशिश करे।ं इसके लिए भी आप खर्च से पहले बचत की सिद्धांत को अपनाएं इससे आपको अंत में बचत करने में आने वाली परेशानी से निजात मिल जाएगी। अगर आप यह सोचेंगे कि पहले खर्च करने के बाद जो बच जाएगा उसे हम जमा करेंगे तो यह आप नहीं बचा पाएंगे और हां इस बात का ध्यान रखें कि किसी भी स्थिति में आपका मासिक व्यय आपके मासिक आय से ज्यादा नहीं होना चाहिए। अगर लगातार यही स्थिति बनी रहती है तो आपको भविष्य में गंभीर आर्थिक संकटों का सामना करना पड़ सकता है। इसीलिए आप ध्यान रखें कि आपका जो मासिक व्यय है, वह आप की मासिक आय के अंदर हो।

7/3/21

धरती पर पानी की उपलब्धता

 नमस्कार दोस्तों

मेरा नाम गुलाब चन्द यादव है। आज मैं आप लोगों को अपने दैनिक जीवन में पानी के महत्तव के बारे में जानकारी दे रहा हॅॅू। जैसा कि आप सभी जानते है कि इस दुनिया में सभी जीवों के लिए पानी बहुत आवष्यक है। बीना पानी के कोई भी जीव जीवित नहीं रह सकता।

लेकिन क्या आपको इस धरती पर पानी की उपलब्धता के बारे में पता है।दोस्तों अब आप सोंच रहें होंगे कि इसमे नई बात क्या हेै हम सभी जानते हैं कि पुरा पृथ्वी पर तो महासागरों के रूप में जल ही जल है। जी हॅा दोस्तों हम सभी जानते हैं कि इस पृथ्वी पर तीन चैथाई भाग पर पानी है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसमें से हमारे उपयोग के लायक कितना पानी है। दोस्तों सागर के पानी में विभीन्न प्रकार के लवण घुले होते है जिस कारण से यह खारा होता है। हम समुद्र के पानी का उपयोग पीने,नहाने, कपडा धोने, सिंचाई आदी के लिए इसका उपयोग नहीं कर सकते। धरती पर जीतना भी पानी उपलब्ध है उसमें से 97 प्रतिषत सागरों में है, 2 प्रतिषत बर्फ के रूप में तथा 1 प्रतिषत ही जल हमारे उपयोग के लायक हैै। जो कि नदियों, तालाबों, झीलों तथा भूमिगत जल के रूप में उपलब्ध है, जीस पर हम निर्भर हैं।

अब हम सागर के पानी का उपयोग कर नहीं सकते, बर्फ जो कि पृथ्वी के दोनो ध्रुवों पर तथा पर्वतों के चोटियांे पर है जीसको उपयोग लायक बनाने लायक संसाधन उपलब्ध नहीं है तो अब बचे 1 प्रतिषत पानी पर ही गुजारा करना हेै तो क्यों ना इसका उपयोग बहुत सोंच समझकर किया जाय तथा इसका संरक्षण पर विषेष ध्यान देने की आवष्यकता है।

23/3/19

जो नसीब में है , वो चल कर आयेगा

✍ *परमात्मा वो है जो 50 टन की व्हेल मछली को भी रोज़ाना समन्दर में पेट भर खाना खिलाता है।*
*तो फिर हम सिर्फ 2 रोटी के लिए इतना परेशान क्यों होते है !*
जो नसीब में है , *वो चल कर आयेगा...*
जो नही है, *वो आकर भी चला जायेगा...*
जिंदगी को इतना सिरियस लेने की जरूरत नही यारो, *यहा से जिंदा बचकर कोई नही जायेगा...*
एक सच ये है की, *अगर जिंदगी इतनी अच्छी होती,तो हम दुनिया में रोते-रोते नही आते...* लेकिन एक मीठा सच ये भी है कें, अगर ये जिंदगी बुरी होती,तो हम जाते-जाते इतने लोगो को रुलाकर ना जाते...
*जी ले आज*
*कल किसने देखा है....*

19/3/19

आप हर किसी को खुश नहीं कर सकते

दोस्तों मेरे आज के कहानी का शीर्षक है कि आप कुछ भी करिए सभी व्यक्तियों को या सभी लोगों को आप एक साथ खुश नहीं कर सकते है आप चाहे जो भी कर लीजिए आप कितना भी कुछ कर लीजिए किसी ना किसी के लिए आप में कुछ दोष या कुछ बुराई या कुछ कमी जरूर नजर आएगी तो मेरे कहने का मतलब यह है, कि इस दुनिया में कोई भी व्यक्ति पूरी तरह से परफेक्ट नहीं है या संपूर्ण नहीं है ठीक है दोस्तों इस  इस संबंध में आपको मैं एक कहानी के माध्यम से यह बात बताना चाहूंगा, है तो दोस्तों बहुत कुछ दिन पहले की बात है कि किसी गांव में एक किसान रहता था वह किसान एक दिन अपने पुत्र के साथ अपने कृषि उत्पाद को विक्रय के लिए बाजार जाता है, बाजार में उसके उस सामान की अच्छी कीमत मिलती है उसके बाद वे दोनों जब वापस आते रहते हैं तो उनको रास्ते में या यूं कहिए बाजार में ही पशुओं के मंडी में एक  विक्रय के लिए गधा दिखाई देता है पिता पुत्र दोनों आपस में सलाह करते हैं और सोचते हैं क्यों ना हम इस गधे को खरीद लें ताकि हमारे कृषि संबंधी जो भी उत्पाद होगा उनको उठाने के लिए हमारी सहायता हो जाएगी या फिर हम हमें मदद मिल जाएगी ठीक है इसके बाद वे दोनों उस गधे को खरीद लेते हैं उसके बाद दोनों अपने घर के लिए वापस आने लगते हैंरास्ते में जब दोनों वापस आते रहते हैं पिता आगे आगे चलता है गधा बीच में और उसका पुत्र गधा को हांकता हुआ पीछे पीछे चलता है तो रास्ते में एक व्यक्ति मिलता है, और बोलता है कि यह दोनों कितने बेवकूफ हैं इस गधे में सवारी करने के बजाय इनको दोनों पैदल लेकर जा रहे हैं तो दोनों विचार करते हैं और सोचते हैं सही बात है कि हमें किसी एक को इस पर सवारी करनी चाहिए तो ऐसे सोच कर  पिता सबसे पहले अपने पुत्र को बिठा देता है और धीरे-धीरे गधे को खींचते हुए चलने लगता है चलते हो हुए आगे कुछ दूर चलने के बाद एक व्यक्ति मिलता है और उनको बोलता है कि पुत्र कितना बेशर्म है इसका पिता पैदल चल रहा है और यह मूर्ख गधे पर बैठा है जबकि होना यह चाहिए इसके पिता को गधे पर सवारी करनी चाहिए और खुद को पैदल चलना चाहिए उसके बाद पुत्र गधे से उतर जाता है, और अपने पिता जी को बोलता है कि आप इसकी सवारी करिए और मैं पैदल चलता हूं अपने पिता को बोलता है कुछ दूर चलने के बाद एक व्यक्ति और मिलता है, और टोकते हुए कहता है कि पिता बहुत ही निर्दई है इसका पुत्र इस भरी दोपहर में धूप में पैदल चल रहा है और यह गधे पर आराम से बैठकर जा रहा है तो फिर दोनों सोचते हैं कि हां ए तो सही बात है उसके बाद दोनों दोनों निर्णय लेते हैं कि हम दोनों एक साथ इस गधे की सवारी करते हैं उसके बाद दोनों उस गधे पर सवार हो जाते हैं कुछ दूर ऐसे चलने के बाद एक व्यक्ति और मिलता है वह उन दोनों को गधे पर बैठे देख के बोलता है यह दोनों आदमी कितने निर्दई हैं इस बेचारे बेजुबान जानवर पर दोनों सवारी कर रहे हैं जबकि होना यह चाहिए कि इन दोनों को पैदल चलना चाहिए और अपने साथ गधे को भी ले जाना चाहिए ठीक है तो यह सोच यह सुनकर दोनों फिर अचंभित हो जाते हैं और दोनों को समझ में नहीं आता कि अब हमें क्या करना चाहिए जब पुत्र बैठता है तब भी लोग बोलते हैं जब मैं बैठता हूं तब भी लोग बोलते हैं जब दोनों बैठते हैं तब भी लोग बोलते हैं तब हम आखिर में क्या करें तो दोनों आखिर में निर्णय करते हैं कि हम दोनों पैदल चलते हैं और गधे को अपने साथ लेकर चलते हैं तो यह सोच कर दोनों नीचे उतर जाते हैं और अपने साथ धीरे-धीरे पैदल चलते हुए गधे को भी साथ ले चलते हैं कुछ दूर ऐसे ही चलते हैं तो फिर एक व्यक्ति मिलता है और उनसे बोलता है कि दोनों कितने बेवकूफ हैं कितने पागल हैं कि दोनों गधे को पैदल चला रहे हैं तो होना यह चाहिए कि दोनों में से किसी को सवारी करना चाहिए लेकिन दोनों पिता-पुत्र का जो अनुभव था वह अच्छा नहीं था ठीक है उसके बाद दोनों फिर सोचते हैं कि अब क्या करना चाहिए हमें कुछ न कुछ तो करना चाहिए ताकि हमें लोगों का लोगों की बात ना सुनना पड़े यह सोचकर पिता पुत्र दोनों यह निर्णय लेते हैं कि हम इस गधे को ही अपने कंधे पर उठाकर ले चलते हैं जिससे कि लोग हमें कुछ नहीं कहेंगे यह सोचकर दोनों उस गधे को एक लकड़ी की बल्ली पर दोनों उसको बांध के टांग लेते हैं और दोनों अपने काँधे पर उठाकर के उसको चलने लगते हैं तो ऐसे चलते चलते कुछ दूर चलते हैं तो कुछ दूर चलने के बाद उन्हें एक व्यक्ति फिर मिलता है और बोलता है कि यह दोनों महामूर्ख हैं इस गधे की सवारी करने के बजाय ये दोनों इस गधे को ढो कर ले जा रहे हैं इनसे मूर्ख इस दुनिया में कोई नहीं है उसके बाद पिता पुत्र दोनों उस गधे को नीचे उतार देते हैं और उनके समझ में यह आ जाता है कि इस दुनिया में सभी व्यक्तियों का देखने का नजरिया अलग अलग होता है हम एक साथ सभी व्यक्तियों को अपने हिसाब से खुश नहीं रख सकते किसी व्यक्ति में जो हम काम कर रहे हैं वह किसी को सही लग सकता है लेकिन अन्यत्र किसी व्यक्ति को वही काम गलत लग सकता हैइसीलिए दोस्तों मैं आप को आप लोगों से यह बोलना चाहूँगा कि हम जो भी काम करें अपने दिल से करें बस समय यह उसके बारे में यह सोचना चाहिए कि हमारे उसका हमसे किसी और को नुकसान ना हो और हमारे जो काम है वह किसी प्रोडक्टिव काम होतो हम उस काम को जल्द से जल्द स्टार्ट कर दें नहीं तो इसी तरह से होते रहेगा

20/1/19

जो होता है अच्छे के लिए होता है.

जो होता है, अच्छे के लिए होता है


नमस्कार दोस्तों, आज मैं आप लोगों को एक कहानी बता रहा हूं जिसका शीर्षक है 'जो होता है अच्छे के लिए होता है' ठीक है. दोस्तो बहुत पहले की एक घटना है, एक राज्य में एक राजा रहता था, तो एक दिन राजा कुछ काम कर रहा था और दुर्घटनावश उसका एक हाथ का अंगूठा कट जाता है, इस बीच उसका सेनापति वहां आता है राजा दर्द से बहुत कराह रहा था. राजा को दर्द से बहुत तकलीफ हो रही थी, लेकिन उसका जो सेनापति था उसने अपने राजा से बोला महाराज जो होता है अच्छे के लिए होता है आप दुखी ना हो. तो इतना सुनकर राजा को बहुत गुस्सा आया और बोलता है मैं दर्द से तड़प रहा हूं और तुम मुझे बोल रहे हो जो होता है अच्छा होता है और वह अपने सेनापति पर बहुत नाराज होता है फिर अपने सैनिकों से कहता है कि इस दुष्ट को कारागार में डाल दो मैं यहां पर दर्द से तड़प रहा हूं और यह मेरे को समझा रहा है जो होता है अच्छे के लिए होता है. फिर इसके बाद उसके सैनिक उस सेनापति को जेल में डाल देते हैं लेकिन सेनापति कुछ नहीं बोलता अपने आप से कहता है जो होता है अच्छे के लिए होता है ऐसे ही कुछ दिन बीत जाते हैं तो एक दिन की बात है वह राजा अपने सैनिकों के साथ शिकार करने के लिए जंगल जाता है, तो शिकार करते - करते वह अपने सैनिकों से बिछड़ जाता है और काफी दूर निकल जाता है. तो उसी समय उस जंगल में कुछ आदिवासी आते हैं, और आदिवासी उस राजा को पकड़कर अपने साथ ले जाते हैं. उन आदिवासियों का कुछ वार्षिक महोत्सव चलता रहता है जिसमें किसी मानव का बलि देना रहता है तो इसी उद्देश्य उस राजा को पकड़ के अपने साथ लोग ले जाते हैं और जब रात होती है तो उस राजा को बलि चढ़ाने के लिए तैयार किया जाता है. और जैसे ही उस राजा को बलि देने के लिए तैयारी पूरी हो जाती तो उसी समय एक आदिवासी की नजर उसके कटे हुए अंगूठे पर जाता है, तो वह झट से अपने सरदार को बोलता है सरदार हम इस आदमी की बलि नहीं दे सकते क्योंकि इसका एक अंग नहीं है मतलब उसका एक अंगूठा नहीं है. तो वह अपने सरदार को बोलता है,की सरदार हमारा जो देवी है वह अधूरे मानव की बलि को स्वीकार नहीं करती। फिर उनका सरदार उसे छोड़ने का आदेश देता है, फिर उस राजा को छोड़ दिया जाता है और वह धीरे-धीरे ढूंढते ढूंढते अपने राज्य में वापस आ जाता है ठीक तो उसके बाद उस राजा को समझ में आ जाता है कि उस दिन सेनापति ने उसको क्या बोला था ,राजन जो होता है अच्छे के लिए होता है फिर इसी बीच वह पछतावा करते हुए उस सेनापति के पास जाता है और उससे माफी मांगने लगता है. तो सेनापति अपने राजा से कहता है की राजन आप मुझसे माफी मत मांगिए जो होता है अच्छे के लिए होता है तो राजा फिर पूछता है कि फिर कैसे बोल रहे हो भाई जो होता है अच्छे के लिए होता है. तब सेनापति ने अपने राजा को जवाब देता है देखिए राजा उस दिन अगर मैंने आपको यह नहीं कहता कि जो होता है अच्छे के लिए होता है तो आप मुझे इस जेल में नहीं डलवाते, ठीक है अगर आप इस जेल में मेरे को नहीं डलवाते तो उस दिन शिकार करने के लिए जब आप गए थे तो आपके साथ मैं भी जाता और जब वह आदिवासी आप को पकड़कर ले जाते और तो उस दिन आपके साथ में मुझे भी वह अपने साथ ले जाते जब आप को बलि चढ़ाने के लिए करते और जब आप के कटे हुए अंगूठे को देखते तो वह आदिवासी आपको छोड़ के मुझे बलि चढ़ा देते तो इसीलिए आपने मुझे जेल में डालने का आदेश दिया इस वजह से मेरी प्राण बच गई तो इसीलिए बोलता हूं जो होता है अच्छे के लिए होता है ठीक है दोस्तों इस कहानी का मेन मोरल यह है कि हमारे साथ जो भी होता है हमें उसके बारे में पछताना नहीं चाहिए और उसके आगे की सोचना चाहिए और हमें जितना भी मिला है जैसा भी मिला है हमें भगवान का शुक्रगुजार होना चाहिए और हमें हमेशा उसके लिए शिकायत नहीं करनी चाहिए जो हमें प्राप्त नहीं हुआ है बल्कि हमें उससे खुश होने की कोशिश करना चाहिए जो हमें मिला है, या जो हमारे पास है. और उसको उससे अपना खुशी व्यक्त करते हुए और कुछ पाने की कोशिश करना चाहिए दोस्तों यह मेरा आज का कहानी था.
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धन्यवाद

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25/8/18

Rakshabandhan

Namashkar dosto aap sabhi ko Rakshabandhan tyohar ki bahut- bahut badhai. Doston jaisa ki aap sabhi jante hain ki Rakshabandhan ka tyohar hamare bhart desh men bahut hi prem purvak manaya jata hai. Rakshabandhan ke din sabhi bahane apne bhai ke kalai par rakhi bandhti hai. Is din sabhi bahan apne bhai se apni Rakaha ke liye Rakhi bandha karti hain. Rakshanbandhan ka tyohar bhai Aur bahan ke prem ka tyohar hai.
  • Happy Rakshbandhan.

14/11/17

भारत






भारत का क्षेत्रफल 3287263 वर्ग किलोमीटर है.  भारत की स्थिति 80 4’ से 3706’ मिनट उत्तरी अक्षांश में स्थित है.
भारत की देशांतर स्थिति 6807’  से 970 25’ पूर्वी देशांतर है.
भारत का विस्तार उत्तर से लेकर दक्षिण 3214 किलोमीटर है,
भारत का विस्तार पूर्व से पश्चिम की ओर 2933 किलोमीटर है भारतीय सीमा 15200 किलोमीटर तक है जबकि इसकी समुद्र तट की लंबाई 7516.6 किलोमीटर है. इसके कुछ राष्ट्रीय प्रतीक चिन्हों के बारे में हम जानते हैं.
राष्ट्रीय ध्वज


संविधान सभा ने 22 जुलाई 1947 को अपनाया 26 जनवरी 2002 से भारतीय ध्वज संहिता-2002 प्रभावी है राज-चिन्ह भारत

सरकार ने 26 जनवरी 1950 को अपनाया यह अशोक के सारनाथ स्तंभ की अनुकृति है मूल स्तंभ में शीर्ष पर 4 दिन सिर्फ पर जाती है भारत के राज्य चिन्ह का उपयोग भारत के राजकीय अनुचित उपयोग अधिनियम 2005 के तहत नियंत्रित होता है.
राष्ट्रगान जन गण मन 24 जनवरी 1950 को अपनाया गया राष्ट्रीय पंचांग कैलेंडर के साथ-साथ शक संवत पर आधारित है इसे 22 मार्च 1957 को अपनाया गया भारत का संविधान 26 नवंबर 1949 को बनकर तैयार हो गया और इसके कुछ अंशों को जिस दिन लागू किया गया है भारत का संविधान पूर्ण रूप से 26 जनवरी 1950 को संपूर्ण भारतवर्ष पर लागू किया गया तथा इस दिन से भारत का संविधान भारत पर प्रभावी हुआ.

21/9/17

Baba Ram Rahim

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15/7/17

Save water.

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27/5/17

The fish

The Fish

A fish has an air bladder in its stomach. It is full of air and a fish can swim or float with its help. A fish swims as fast as a good racer. Its speed is about five hundred meters in a minute.
                A fish takes oxygen from water. One can see some beautiful orange, black and golden fish in an aquarium. Goldfish can be seen in the pond. They shine a bright as gold.
                A fish takes water into its mouth and throws it out again. It takes oxygen from the water before throwing it out.
                If we with a goldfish closely, we will see that its body is like a boat. It swims with the help of its fins.
                A female fish lays a large number of eggs in water. A fish sleeps too, but it does not close its eyes. This is because it has no eyelids. A fish can see with its eyes. No one can see its ears because the ears are hidden. A fish can smell also. A fish does not feel cold in the water because the temperature of its body changes with the temperature of the water
                Children if you want to enjoy seeing fish, you can deep an aquarium at home. An aquarium is a glass tank. It should not be kept in the sun. Water weeds and water snails are collected along with sand and pebbles. These things are put into the aquarium. It is great fun to watch a goldfish and other fish as pets.

29/3/17

आत्मसंतुष्टि प्रगति में बाधक



          आज मैं एक कहानी के माध्यम से आप लोगों के साथ एक बात कहना चाहता हूँ। कि कैसे हम काम चलाऊ जीवन यापन करने की मानसिकता एक व्यक्ति को अपने जीवन में आगे बढ़ने से रोकता है।
          पुराने समय की बात है उन दिनों शिक्षा ग्रहण करने के लिए लोगो को अपने गुरु के आश्रम में ही रहकर शिक्षा ग्रहण करनी पड़ती थी। जहाँ शिष्य को तमाम जानकारी चाहे वो व्यवहारिक हो या सैधन्तिक सभी वहीं से सिखनी होती थी।
            गुरु अपने शिष्य के साथ प्रवचन देने के लिये नगर भ्रमण के लिए निकल गए। काफी दिनों तक यह सिलसिला चलता रहा। एक दिन की बात है भ्रमण कारते-करते शाम हो गई। तब गुरु ने अपने शिष्य से कहा कुछ समय बाद रात होने वाली है, और आगे का रास्ता जंगल से होकर गुजरता है। अतः हमारा रात में सफर करना ठीक नहीं होगा। आज रात हम यहीं किसी के घर में बिताएंगे।
            कुछ ही दुरी पर एक टुटा-फूटा झोपडी नुमा घर नजर आता है। वे वहीँ रात बिताने का निर्णय करते है और घर में प्रवेश करते है। घर का मालिक भला व्यक्ति था उसने अपने सामर्थ्य के अनुसार उनका आदर सत्कार करता है।
             कुछ समय बाद गुरु ने उस व्यक्ति से कहा जब हम आपके यहाँ आ रहे थे पास में ही बहुत अच्छी उपजाऊ भूमि दिखी जिसमें वर्तमान में कुछ भी फसल नही लगा है, वह भूमि किसकी है? इसके जवाब में उस व्यक्ति ने कहा महोदय वे सभी भूमि मेरी ही है। तो गुरु ने प्रश्न किया कि आप कि आय का साधन क्या है? तो उस व्यक्ति ने उत्तर दिया की मेरे पास एक भैस है जो अच्छी-खासी दूध देती है। मैं उसी दूध को बाजार में बेचता हु जिससे कुछ पैसे मिल जाते है। तथा कुछ मेरे लिए भी बच जाता है, जिसे मै भोजन के रूप में ग्रहण करता हूँ। अब आप ही बताइए भला मुझे कृषि करने की क्या आवश्यकता है।
             जब गुरु- शिष्य सोने जा रहे थे तभी गुरु ने शिष्य से कहा आज हमें भोर में जल्दी उठना है, साथ ही इस व्यक्ति का भैंस को चोरी करके साथ ले जाएंगे। शुरू में तो तो शिष्य को अपने गुरु की बात अजीब लगा। किन्तु उसका विरोध नहीं कर पाया। सुबह दोनों भोर में ही उठकर चल दिए तथा उस व्यक्ति के भैंस को भी चोरी कर साथ ले गए और पहाड़ी से नीचे गिराकर मार दिया।
             कुछ दिनों के बाद शिष्य की शिक्षा पूरी हो गई। वह अपने काम-धंधे में अच्छी तरक्की करता है,और एक बड़ा आदमी बन जाता है। कुछ वर्षों के बाद उसी रास्ते से गुजर रहा था, तभी उसे उस आदमी का ध्यान आता है जिसके यहां उन्होंने रात गुजारी थी। उसे उस आदमी पर बहुत दया आ रहा था उसने सोचा की चलो आज उस व्यक्ति की कुछ आर्थिक सहायता किया जाए, हम लोगो ने उसकी आय के साधन उस भैंस को मार दिया था। यह सोचते हुए उस व्यक्ति से मिलने के लिए उसके घर की तरफ जाने लगा। जाते हुए उसने देखा की जहाँ पर बेकार भूमि पड़ी थी वहां हरे भरे फसल लहरा रहे थे। उस जमीन पर कई फलदार वृक्ष लगे थे।
               जब वहां पहुचा तो उस झोपड़ी के स्थान पर एक आलिशान घर को पाया। उसने सोचा वह व्यक्ति शायद अपना घर-जमीन बेच कर कहीं अन्य जगह चला गया होगा। उसने यह सोचते हुए दरवाजा खटखटाया जब घर मालिक ने दरवाजा खोला तो वह आश्चर्य से उस व्यक्ति को देखने लगा। बातो ही बातो में जब उसने पूछा की क्या आप मुझे पहचानते हैं कुछ वर्षो पूर्व मैं अपने गुरु जी के साथ यहां रात बिताने के लिए रुका था। तब उस व्यक्ति ने जवाब दिया की मैं आप लोगो को कैसे भूल सकता हु। किन्तु आप लोगो से शिकायत है की आप लोग बिना बताए ही यहां से चले गए थे। और हाँ उसी दिन एक और दुखद घटना हुई थी पता नहीं कैसे मेरी भैंस पहाड़ी पर चली गई और वहां से गिर कर मर गई।
                 उस शिष्य ने उससे पूछा फिर ये चमत्कार कैसे हुआ आप इतने धनवान कैसे हो गए। तब उस व्यक्ति ने जवाब दिया की जब मेरी भैंस मर गई तो मेरे सामने जीविका चलाने का संकट पैदा हो गया था। तब मेरे समझ में नहीं आ रहा था कि अब क्या करु तभी मन में ख्याल आया की चलो पेट भरने के लिए खाली जमीन पर खेती किया जाए और थोड़े से जमीं पर खेती कार्य शुरू किया। जब अच्छी पैदावार मिलने लगी तो सोचा क्यों न इसे अच्छी आमदनी का जरिया बनाकर किया जाए। यही सोचकर बागवानी, फल सब्जी की खेती भी शुरू कर दिया जिससे अच्छी आमदनी होने लगी, जिसका नतीजा आप के सामने है। यह सुनकर वह आदमी भहुत खुश हुआ और आज उसे समझ में आ गया था की उसके गुरूजी ने क्यों उस दिन उस भैंस को मार दिया था।
                 
                 इस कहानी से यह सिख मिलती है की हम जब अपने काम से संतुष्ट हो जाएंगे कुछ नया नही सोंचेंगे तब तक हम जहां हैं वही रहेंगे।     

28/3/17

मूर्ख ब्राह्मण

 तीन चोरों ने मिलकर कैसे एक ब्राह्मण को बेवकूफ बनाया ....


         गंगा के किनारे एक गांव में, एक ब्राह्मण रहता था। वह एक धार्मिक और ईश्वर से भयभीत व्यक्ति था। वह अन्य लोगों के, घर में पूजा-पाठ कर के अपना जीवन यापन कर रहा था। एक दिन ब्राह्मण को पड़ोसी गांव में एक उत्सव में पूजा के लिए बुलाया गया।उसके इन सेवाओं के बदले, उन्हें एक बकरा उपहार के रूप में मिला।
ब्राह्मण ने आभार व्यक्त किया और प्रसन्न हुआ। उपहार में मिले बकरे को कंधे में उठाकर घर की और चंलने लगा। वह मन में विचार करने लगा।  "यह एक उदार परिवार था,जो मुझे एक बकरा मिला है।" मेरी पत्नी और बच्चे बहुत प्रसन्न होंगे। जैसे ही वह अपने रास्ते से गाँव तरफ चंलने लगा। उसने ध्यान नहीं दिया कि उसके ऊपर नजर रखा जा रहा है। तीन चोरों द्वारा उसका पीछा किया जा रहा था। "हमें उस मोटे बकरे को पाना चाहिए", पहले चोर ने कहा।   "यह हमारे लिए एक बहुत अच्छा भोजन होगा",  दूसरा चोर ने कहा। "हमें पहले एक योजना के बारे में सोचने की जरूरत है।" तीसरे चोर ने कहा। तीनो ने ब्राह्मण को मूर्ख बनाने का फैसला किया।
तीनों चोरों में से पहला चोर ब्राह्मण के पास गया और कहा, "प्रिय ब्राह्मण, आप एक पवित्र व्यक्ति हैं, आप अपने कंधों पर इस 'गंदे कुत्ते' को क्यों ले जा रहे हैं?" "एक गंदे कुत्ता।" क्या आप नहीं देख सकते हैं कि यह एक बकरा है क्या आप अंधे हैं?" ब्राह्मण गुस्से में कहा। पहला चोर हँसा और चला गया।
ब्राह्मण ने बकरे की ओर देखा, और कहा "यह एक बकरा ही है"। और इसलिए उसने घर के लिये अपनी यात्रा फिर से शुरू किया। रास्ते में कुछ दूर जाने के बाद,आगे ब्राह्मण के पास दूसरा चोर आया। दूसरे चोर ने आश्चर्य व्यक्त करते हुए ब्राह्मण से कहा, "आप एक धार्मिक आदमी हैं, आप अपने कंधे पर एक मरे हुए बछड़े को क्यों ले जा रहे हैं"? ब्राह्मण क्रोधित हुआ और कहा "यह जीवित बकरा है ना कि, मृत बछड़ा।"
ब्राह्मण मुश्किल से कुछ दूर चला था, तब तीसरा चोर ब्राह्मण की ओर हाथ लहराते हुए आया "उस गधे को एक बार जमीन पर रख दो।  यदि लोग आप को अपने कंधो पर एक 'गधे' को लादकर ले जाते हुए देखेंगे तो लोग आप के बारे में क्या सोचेंगे?" अब तक ब्राह्मण बहुत उलझन में पड़ चूका था। और सोचने लगा तीन अलग-अलग लोगों ने उसे बताया था कि वह अलग-अलग किसी जानवर को ले रहा है, ना कि एक बकरा को। उसने सोचा कि कुछ चीज गलत हो रहा है। "यह कोई बकरा नहीं है, यह कोई एक भयानक राक्षस होगा जो पल-पल अपना रूप बदल रहा है।" और यह सोचते हुए ब्राह्मण ने बकरे को नीचे फेंक दिया और जितने तेजी से अपने घर की ओर भाग सकता था,वह भाग गया।
तीनों चोर बहुत जोर-जोर से हंसने लगे। और वे अपनी योजना में सफल हुए।  उन्होंने बकरे को उठाया और लेकर चल दिए।  ब्राह्मण ने उनपर विश्वास करके कितनी मूर्खता कर दी थी।

27/3/17

जब एक 'हंस' ने मामले को सुलझाया।


                         बड़ा कौन है- मारने वाला या बचने वाला? इसका निर्णय हंस ने किया। 


                         शुधोधना एक महान राजा था।  एक दिन वे अपने सिंहासन पर बैठे थे। उनके दरबारमें उनके मंत्रि भी मौजूद थे। वे राज्य के मामलों पर चर्चा कर रहे थे। तभी उनके द्वारपाल दरबार में प्रवेश किया। उन्होंने राजा को देव दत्त के आगमन के बारे में राजा को सूचित किया। राजा ने उनको दरबार में आने की अनुमति दे दी और देव दत्त ने दरबार में प्रवेश किया।

देवदत्त  ने राजकुमार सिद्धार्थ के खिलाफ शिकायत की। उन्होंने राजा से कहा कि सिद्धार्थ ने उसका हंस ले लिया है।  उन्होंने दावा किया कि हंस उनका था क्योंकि उसने इसे गोली मारी थी। उसने न्याय के लिए राजा से प्रार्थना की

राजा ने सिद्धार्थ को दरबार में बुलाया सिद्धार्थ ने हंस के साथ दरबार  में प्रवेश किया सिद्धार्थ ने राजा को बताया कि उसने इस हंस को बचाया है इस लिये यह मेरा हुआ।

यह एक अजीब मामला था। राजा इसे तय करने में असमर्थ था वह उलझन में था राजा ने अपने मुख्यमंत्री को इस मामले की सुनवाई करने और मामला हल करने का आदेश दिया।                                                                                                                                                                          
मुख्यमंत्री ने सिद्धार्थ को स्टूल पर हंस को रखने के लिये कहा। देवदत्त ने उस हंस को बुलाया।  हंस डर से काँपने लगा और भय से रोया।

अब राजकुमार सिद्धार्थ की बारी थी।  उसने उस हंस को बुलाया तब हंस उड़कर सिद्धार्थ के हाथों में जाकर बैठ गया।  मामला सिद्धार्थ के पक्ष में तय किया गया। और हंस उसे दे दिया गया।

                             इसी लिए कहा गया है कि हमेशा मारने वाले से बड़ा बचाने वाला होता है। 

23/3/17

गोपाल भांड और महाज्ञानी

लगभग 200 साल पहले राजा कृष्ण चंद्र बंगाल के एक हिस्से पर शासन करते थे। उनके अदालत में गोपाल भाण्ड नाम का मशखरा था। हालांकि गोपाल भांड  ने किताबों का अध्ययन नहीं किया था, किन्तु वह बहुत बुद्धिमान व्यक्ति था।
एक बार, एक बहुत ही दक्ष आदमी, महाग्यानी पंडित अदालत में आया। उन्होंने सभी भारतीय भाषाओं में स्पष्ट रूप से और पूरी तरह से बात की। उन्हें दर्शन और धर्म का अच्छा ज्ञान था।
उसने सभी प्रश्नों का बहुत बुद्धिमानी से उत्तर दिया लोग उससे बात करने काबिलियत से आश्चर्यचकित थे।  लेकिन कोई भी उनकी मातृभाषा की पहचान नहीं कर सका।
जब भी उन्होंने उससे पूछा जाता, वह अहंकार से मुस्कुराता और कहता, "वास्तव में जो बुद्धिमान व्यक्ति होगा वह मेरी मातृभाषा को आसानी से जान जायगा।"
राजा कृष्ण चंद्र बहुत परेशान था।  इसलिए उन्होंने इसके के लिए एक इनाम की घोषणा की, जो पंडित की मातृभाषा को बता सकता था।
सभी विद्वानों ने ध्यान से महाज्ञानी की बात सुनी। लेकिन कोई भी उसकी मातृभाषा की पहचान नहीं कर सका "आप पर शर्म आनी चाहिए", राजा ने गुस्से में कहा।  सभी विद्वान चुप थे। गोपाल भांड झटके से खड़ा हो गया। उन्होंने कहा, "महाराज, मुझे मौका दो।" "आप कैसे बता सकते हैं?", राजा ने पूछा "महाराज!" मैं बात नहीं करूंगा वह आपको अपने आप ही बताएंगे, "गोपाल भांड ने जवाब दिया।
अगली सुबह राजा अपने बगीचे में टहल रहा था। गोपाल भांड जल्दी से उनके पास भागा और कहा, "मैंने महाज्ञानि पंडित को बताया है कि आप उसे गुलाब की हार के साथ सम्मान करने जा रहे हैं।" "क्या", राजा ने आश्चर्य से कहा।
कुछ समय बाद में राजा ने महाज्ञानी पंडित को आशा के अनुरूप अपनी ओर आते देखा।  वह रेशमी कपड़ों में था।
गोपाल भांड खुद पेड़ो के पीछे छिप गया। महाज्ञानी जैसे ही पेड़ के पास आए, उन्होंने अपना पैर बाहर कर दिया और पंडित को गिरा दिया। महाज्ञानी पंडित ताजा किचड़ जमीन पर गिर गया। वह उठ कर बैठ गया और अपनी मातृभाषा में गोपाल भांड पर चिल्लाने लगा। गोपाल भांड ने कहा,!"महाराज" अब आप जानते हैं, पंडित की" मातृभाषा क्या है! "
महागनी पंडित उठकर गोपाल भांड से कहा, "बुद्धिमान व्यक्ति, आपने मुझे समझदारी से फँस दिया है" और वह चले गए।

चंद्रमा पर खरगोश -कहानी

इस कहानी में एक खरगोश के त्याग के बारे में बताया गया है, जो एक भूखे सन्यासी का भूख मिटाने के लिए स्वयं
उसका भोजन बनने के लिए तैयार हो जाता है।

एक खरगोश एक जंगल में रहता था, उसके दो दोस्त थे- एक बंदर और एक उल्लू। वे तीनो बहुत समय से एक साथ रह रहे थे।
एक दिन, एक साधु वन में आया वह बहुत थका हुआ था, और भूखा भी था।
उल्लू मछली को पकड़े हुए था, साधु उसके पास गया "मुझे भूख लगी है," उन्होंने कहा।
मेरे पास कुछ मछलियां हैं,उल्लू ने कहा, "कृपया उन्हें ले लो।"
 "लेकिन मैं मछली नहीं खाता हूं," साधु ने कहा।
"क्या कुछ और है?"
 "माफ करना," उल्लू ने कहा "
"मेरे पास और कुछ नहीं है।"
बंदर सूखे फल खा रहा था
साधु उसके पास गया।
साधु ने कहा, "मैं बहुत भूखा हूं"
"क्या आप मुझे कुछ खाना दे सकते हैं?"
"मेरे पास कुछ सूखे फल हैं," बंदर ने कहा।
"ओह! लेकिन मैं उनमें से बहुत चाहता हूं," साधु ने कहा,
"मैं बहुत भूखा हूँ।"
बंदर ने कहा, "मुझे खेद है, मेरे पास केवल कुछ ही हैं।"
"'मैं फिर खरगोश से पूछता हूं,' ऐसा साधु ने कहा।
खरगोश हरे घास खा रहा था
साधु उसके पास गया।
"मुझे बहुत भूख लगी है, साधु ने कहा।"
"कृपया, क्या आप मुझे कुछ खाना दे सकते हैं?"
खरगोश ने कहा, "मेरे पास बहुत घास है"।
"लेकिन मैं घास नहीं खाता !" एक मुस्कुराहट के साथ साधु ने कहा
"क्या आपके पास कुछ और है?"
"नहीं, मुझे खेद है," खरगोश ने कहा
साधु ने कहा, "मैं बहुत भूखा हूं, और मैं थका हुआ हूं"।
"अब मैं क्या करूँ?"
खरगोश यहाँ एक मिनट के लिए सोचा और कहा "रुकिए,"। "कृपया दूर मत जाओ।"
खरगोश कुछ लकड़ी लाया।उसने एक साथ पत्थर मारकर आग जला दी। "आप मुझे खा सकते हैं," खरगोश ने कहा।
और आग में कूद गया। लेकिन आग उसे नहीं जलाई! वह बाहर देखा, लेकिन साधु वहाँ नहीं था एक देवदूत उसके सामने खड़ा था
उसने अपनी बाहों में खरगोश को लिया, और उड़ गए उसने उसे चंद्रमा पर रखा, चाँद पर देखो आप अभी भी इस पर खरगोश को देख सकते हैं।

22/3/17

'मसाई' का घर

             मसाई एक जनजाति है, जो कि पूर्वी अफ्रीका में निवास करती है। मसाई अपने मवेशी और उनके खेतों के पास चरागाह मैदानों पर छोटे परंपरागत घरों में रहना पसंद करते हैं। मसाई महिलाएं अपने घरों का निर्माण करती हैं।
            सबसे पहले, वे आयताकार, जमीन घर के आकार का खाका खीचते हैं। वे शाखाएं और टहनियों को जोड़कर बुनाई करके एक फ्रेम बनाते हैं फिर, वे इमारत को  सूखी रखने के लिए बाहर घास और गोबर का मोटी परत लगा देते हैं। यह करना आवश्यक है, क्योंकि बहार का मौसम नम होता है।
             मसाई लोगों के घर के अंदर सिर्फ एक कमरा होता है। लगभग छह लोग एक साथ एक बड़ी शाखाओं से बनी एक बड़े बिस्तर में सोते हैं। घर के अंदरूनी कोने में मां और बच्चे सोते हैं।
               घर के अन्दर सेंटर में एक आग जलाने का स्थान होता हैं। यहीं पर आग जलाइ जाती है।  यह खाना पकाने, गर्मी और प्रकाश के लिए भी प्रयोग किया जाता है। मसाई के घर में कोई खिड़कि नहीं होती हैं। केवल एक छोटा रोशनदान प्रकाश अंदर आने और धुआं बाहर करने के लिए रखा जाता है।
               पशु मसाई परिवार के जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। बछड़ों और बकरियां को घर के अंदर एक विशेष स्थान में रखा जाता हैं। वे लंबे बर्तन में दूध पीते हैं,जिसको कुलाबा कहा जाता है। जिसको खोखला हुआ लौंडे से बनाया जाता है।

18/3/17

"यह भी गुजर जाएगा"

             पुराने दिनों में एक राजा रहता था उसका नाम सुलैमान था।  वह स्वभाव से नीच था।  एक दिन वह एक क्रोधी मनोदशा में था, और अपने मंत्री को एक सबक सिखाने का सोचा।
राजा ने अपने मंत्री को एक ऐसा काम सौंपा, जो असंभव था। उन्होंने उसे असाधारण सुविधाओं के साथ एक जादू की अंगूठी खोजने का आदेश दिया। उन्होंने अपने मंत्री से कहा, "यदि कोई खुश है और अंगूठी पहन रखा है, तो वह दुखी होना चाहिए। और इसके विपरीत यदि कोई नाखुश है, लेकिन अंगूठी पहना, तो वह खुश होना चाहिए ऐसी अंगूठी खोज कर लाओ।"
मंत्री ने सोचा कि राजा उसके साथ गुस्से में है, यही वजह है कि वह उसे एक असंभव काम दे रहे हैं।
राजा ने आगे कहा, "मैंने आपकी खोज के लिए छह महीने का समय तय किया है। अगर आप आवंटित अवधि में कार्य नहीं कर पाए, तो परिणाम आपके भाग पर दुखी होगा।"
मंत्री जानते थे कि विश्व में  ऐसी अंगूठी मौजूद नहीं थी वह ह्रदय में गहराई से उसने एक चमत्कार के लिए कड़ी मेहनत की। वह इस तरह की अंगूठी के लिए पूरे देश में चले गए। समय सीमा समाप्त होने से पहले, उन्होंने देश के सबसे गरीब स्थानों में से एक के पास जाने का फैसला किया।
वहां मंत्री ने एक व्यापारी को देखा जो अपने पुराने सामानो को कालीन पर फैला रहा था। उसने अपने साथ एक दांव खेलने का फैसला किया। इसलिए उसने व्यापारी से कहा, "क्या आपके पास एक जादू की अंगूठी है जो एक खुश आदमी को अपनी खुशी को भूला सकती है, और दुखी व्यक्ति अपने दुःख को भूला सकता है?"
व्यापारी मुस्कुराया वह अपने सामान में से एक सोने की अंगूठी लेकर आया। उसने उस पर चार शब्द लिखा मंत्री ने सोने की अंगूठी ली। उन्होंने लेख पढ़ा और बेहद खुश हुआ। उन्होंने महसूस किया कि उनका लक्ष्य पूरा हो गया था। उसने व्यापारी को धन्यवाद दिया और सोलोमन वापस चला गया।  सुलैमान और उसके सभी अन्य मंत्रियों ने उसका मज़ाक उड़ाया। उन्होंने उन्हें परेशान किया क्योंकि उन्हें उम्मीद थी कि वे खाली हाथ वापस लौट आएंगे।
मंत्री ने मुस्कुराया और राजा को सोने की अंगूठी की पेशकश की। राजा ने इस पर क्या लिखा था उसे पढ़ा और अपनी गलती का एहसास हुआ। उन्होंने मंत्री को चिढ़ाना बंद कर दिया।
अंगूठी पर लिखा शब्द था " यह भी गुजर जाएगा" अचानक सोलोमन ने महसूस किया कि जीवन में सब कुछ क्षणिक है और कुछ भी स्थाई नहीं है। खुशी को दुख से बदल दिया जाएगा, और इसके विपरीत, खुशी से दुख होगा। यह एक चक्र है जो कभी भी बंद नहीं होता।
राजा मंत्री के काम से खुश हुआ, और उसे सार्वजनिक रूप से सम्मानित किया।

खंडगिरी और उदयगिरी गुफाएँ – इतिहास की पत्थरों पर उकेरी कहानी

     स्थान: भुवनेश्वर, ओडिशा      प्रसिद्धि: प्राचीनजैन गुफाएँ, कलात्मक शिल्पकला, ऐतिहासिक महत्व  परिचय भारत की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक ...