15/7/17

Save water.

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27/5/17

The fish

The Fish

A fish has an air bladder in its stomach. It is full of air and a fish can swim or float with its help. A fish swims as fast as a good racer. Its speed is about five hundred meters in a minute.
                A fish takes oxygen from water. One can see some beautiful orange, black and golden fish in an aquarium. Goldfish can be seen in the pond. They shine a bright as gold.
                A fish takes water into its mouth and throws it out again. It takes oxygen from the water before throwing it out.
                If we with a goldfish closely, we will see that its body is like a boat. It swims with the help of its fins.
                A female fish lays a large number of eggs in water. A fish sleeps too, but it does not close its eyes. This is because it has no eyelids. A fish can see with its eyes. No one can see its ears because the ears are hidden. A fish can smell also. A fish does not feel cold in the water because the temperature of its body changes with the temperature of the water
                Children if you want to enjoy seeing fish, you can deep an aquarium at home. An aquarium is a glass tank. It should not be kept in the sun. Water weeds and water snails are collected along with sand and pebbles. These things are put into the aquarium. It is great fun to watch a goldfish and other fish as pets.

29/3/17

आत्मसंतुष्टि प्रगति में बाधक



          आज मैं एक कहानी के माध्यम से आप लोगों के साथ एक बात कहना चाहता हूँ। कि कैसे हम काम चलाऊ जीवन यापन करने की मानसिकता एक व्यक्ति को अपने जीवन में आगे बढ़ने से रोकता है।
          पुराने समय की बात है उन दिनों शिक्षा ग्रहण करने के लिए लोगो को अपने गुरु के आश्रम में ही रहकर शिक्षा ग्रहण करनी पड़ती थी। जहाँ शिष्य को तमाम जानकारी चाहे वो व्यवहारिक हो या सैधन्तिक सभी वहीं से सिखनी होती थी।
            गुरु अपने शिष्य के साथ प्रवचन देने के लिये नगर भ्रमण के लिए निकल गए। काफी दिनों तक यह सिलसिला चलता रहा। एक दिन की बात है भ्रमण कारते-करते शाम हो गई। तब गुरु ने अपने शिष्य से कहा कुछ समय बाद रात होने वाली है, और आगे का रास्ता जंगल से होकर गुजरता है। अतः हमारा रात में सफर करना ठीक नहीं होगा। आज रात हम यहीं किसी के घर में बिताएंगे।
            कुछ ही दुरी पर एक टुटा-फूटा झोपडी नुमा घर नजर आता है। वे वहीँ रात बिताने का निर्णय करते है और घर में प्रवेश करते है। घर का मालिक भला व्यक्ति था उसने अपने सामर्थ्य के अनुसार उनका आदर सत्कार करता है।
             कुछ समय बाद गुरु ने उस व्यक्ति से कहा जब हम आपके यहाँ आ रहे थे पास में ही बहुत अच्छी उपजाऊ भूमि दिखी जिसमें वर्तमान में कुछ भी फसल नही लगा है, वह भूमि किसकी है? इसके जवाब में उस व्यक्ति ने कहा महोदय वे सभी भूमि मेरी ही है। तो गुरु ने प्रश्न किया कि आप कि आय का साधन क्या है? तो उस व्यक्ति ने उत्तर दिया की मेरे पास एक भैस है जो अच्छी-खासी दूध देती है। मैं उसी दूध को बाजार में बेचता हु जिससे कुछ पैसे मिल जाते है। तथा कुछ मेरे लिए भी बच जाता है, जिसे मै भोजन के रूप में ग्रहण करता हूँ। अब आप ही बताइए भला मुझे कृषि करने की क्या आवश्यकता है।
             जब गुरु- शिष्य सोने जा रहे थे तभी गुरु ने शिष्य से कहा आज हमें भोर में जल्दी उठना है, साथ ही इस व्यक्ति का भैंस को चोरी करके साथ ले जाएंगे। शुरू में तो तो शिष्य को अपने गुरु की बात अजीब लगा। किन्तु उसका विरोध नहीं कर पाया। सुबह दोनों भोर में ही उठकर चल दिए तथा उस व्यक्ति के भैंस को भी चोरी कर साथ ले गए और पहाड़ी से नीचे गिराकर मार दिया।
             कुछ दिनों के बाद शिष्य की शिक्षा पूरी हो गई। वह अपने काम-धंधे में अच्छी तरक्की करता है,और एक बड़ा आदमी बन जाता है। कुछ वर्षों के बाद उसी रास्ते से गुजर रहा था, तभी उसे उस आदमी का ध्यान आता है जिसके यहां उन्होंने रात गुजारी थी। उसे उस आदमी पर बहुत दया आ रहा था उसने सोचा की चलो आज उस व्यक्ति की कुछ आर्थिक सहायता किया जाए, हम लोगो ने उसकी आय के साधन उस भैंस को मार दिया था। यह सोचते हुए उस व्यक्ति से मिलने के लिए उसके घर की तरफ जाने लगा। जाते हुए उसने देखा की जहाँ पर बेकार भूमि पड़ी थी वहां हरे भरे फसल लहरा रहे थे। उस जमीन पर कई फलदार वृक्ष लगे थे।
               जब वहां पहुचा तो उस झोपड़ी के स्थान पर एक आलिशान घर को पाया। उसने सोचा वह व्यक्ति शायद अपना घर-जमीन बेच कर कहीं अन्य जगह चला गया होगा। उसने यह सोचते हुए दरवाजा खटखटाया जब घर मालिक ने दरवाजा खोला तो वह आश्चर्य से उस व्यक्ति को देखने लगा। बातो ही बातो में जब उसने पूछा की क्या आप मुझे पहचानते हैं कुछ वर्षो पूर्व मैं अपने गुरु जी के साथ यहां रात बिताने के लिए रुका था। तब उस व्यक्ति ने जवाब दिया की मैं आप लोगो को कैसे भूल सकता हु। किन्तु आप लोगो से शिकायत है की आप लोग बिना बताए ही यहां से चले गए थे। और हाँ उसी दिन एक और दुखद घटना हुई थी पता नहीं कैसे मेरी भैंस पहाड़ी पर चली गई और वहां से गिर कर मर गई।
                 उस शिष्य ने उससे पूछा फिर ये चमत्कार कैसे हुआ आप इतने धनवान कैसे हो गए। तब उस व्यक्ति ने जवाब दिया की जब मेरी भैंस मर गई तो मेरे सामने जीविका चलाने का संकट पैदा हो गया था। तब मेरे समझ में नहीं आ रहा था कि अब क्या करु तभी मन में ख्याल आया की चलो पेट भरने के लिए खाली जमीन पर खेती किया जाए और थोड़े से जमीं पर खेती कार्य शुरू किया। जब अच्छी पैदावार मिलने लगी तो सोचा क्यों न इसे अच्छी आमदनी का जरिया बनाकर किया जाए। यही सोचकर बागवानी, फल सब्जी की खेती भी शुरू कर दिया जिससे अच्छी आमदनी होने लगी, जिसका नतीजा आप के सामने है। यह सुनकर वह आदमी भहुत खुश हुआ और आज उसे समझ में आ गया था की उसके गुरूजी ने क्यों उस दिन उस भैंस को मार दिया था।
                 
                 इस कहानी से यह सिख मिलती है की हम जब अपने काम से संतुष्ट हो जाएंगे कुछ नया नही सोंचेंगे तब तक हम जहां हैं वही रहेंगे।     

28/3/17

मूर्ख ब्राह्मण

 तीन चोरों ने मिलकर कैसे एक ब्राह्मण को बेवकूफ बनाया ....


         गंगा के किनारे एक गांव में, एक ब्राह्मण रहता था। वह एक धार्मिक और ईश्वर से भयभीत व्यक्ति था। वह अन्य लोगों के, घर में पूजा-पाठ कर के अपना जीवन यापन कर रहा था। एक दिन ब्राह्मण को पड़ोसी गांव में एक उत्सव में पूजा के लिए बुलाया गया।उसके इन सेवाओं के बदले, उन्हें एक बकरा उपहार के रूप में मिला।
ब्राह्मण ने आभार व्यक्त किया और प्रसन्न हुआ। उपहार में मिले बकरे को कंधे में उठाकर घर की और चंलने लगा। वह मन में विचार करने लगा।  "यह एक उदार परिवार था,जो मुझे एक बकरा मिला है।" मेरी पत्नी और बच्चे बहुत प्रसन्न होंगे। जैसे ही वह अपने रास्ते से गाँव तरफ चंलने लगा। उसने ध्यान नहीं दिया कि उसके ऊपर नजर रखा जा रहा है। तीन चोरों द्वारा उसका पीछा किया जा रहा था। "हमें उस मोटे बकरे को पाना चाहिए", पहले चोर ने कहा।   "यह हमारे लिए एक बहुत अच्छा भोजन होगा",  दूसरा चोर ने कहा। "हमें पहले एक योजना के बारे में सोचने की जरूरत है।" तीसरे चोर ने कहा। तीनो ने ब्राह्मण को मूर्ख बनाने का फैसला किया।
तीनों चोरों में से पहला चोर ब्राह्मण के पास गया और कहा, "प्रिय ब्राह्मण, आप एक पवित्र व्यक्ति हैं, आप अपने कंधों पर इस 'गंदे कुत्ते' को क्यों ले जा रहे हैं?" "एक गंदे कुत्ता।" क्या आप नहीं देख सकते हैं कि यह एक बकरा है क्या आप अंधे हैं?" ब्राह्मण गुस्से में कहा। पहला चोर हँसा और चला गया।
ब्राह्मण ने बकरे की ओर देखा, और कहा "यह एक बकरा ही है"। और इसलिए उसने घर के लिये अपनी यात्रा फिर से शुरू किया। रास्ते में कुछ दूर जाने के बाद,आगे ब्राह्मण के पास दूसरा चोर आया। दूसरे चोर ने आश्चर्य व्यक्त करते हुए ब्राह्मण से कहा, "आप एक धार्मिक आदमी हैं, आप अपने कंधे पर एक मरे हुए बछड़े को क्यों ले जा रहे हैं"? ब्राह्मण क्रोधित हुआ और कहा "यह जीवित बकरा है ना कि, मृत बछड़ा।"
ब्राह्मण मुश्किल से कुछ दूर चला था, तब तीसरा चोर ब्राह्मण की ओर हाथ लहराते हुए आया "उस गधे को एक बार जमीन पर रख दो।  यदि लोग आप को अपने कंधो पर एक 'गधे' को लादकर ले जाते हुए देखेंगे तो लोग आप के बारे में क्या सोचेंगे?" अब तक ब्राह्मण बहुत उलझन में पड़ चूका था। और सोचने लगा तीन अलग-अलग लोगों ने उसे बताया था कि वह अलग-अलग किसी जानवर को ले रहा है, ना कि एक बकरा को। उसने सोचा कि कुछ चीज गलत हो रहा है। "यह कोई बकरा नहीं है, यह कोई एक भयानक राक्षस होगा जो पल-पल अपना रूप बदल रहा है।" और यह सोचते हुए ब्राह्मण ने बकरे को नीचे फेंक दिया और जितने तेजी से अपने घर की ओर भाग सकता था,वह भाग गया।
तीनों चोर बहुत जोर-जोर से हंसने लगे। और वे अपनी योजना में सफल हुए।  उन्होंने बकरे को उठाया और लेकर चल दिए।  ब्राह्मण ने उनपर विश्वास करके कितनी मूर्खता कर दी थी।

27/3/17

जब एक 'हंस' ने मामले को सुलझाया।


                         बड़ा कौन है- मारने वाला या बचने वाला? इसका निर्णय हंस ने किया। 


                         शुधोधना एक महान राजा था।  एक दिन वे अपने सिंहासन पर बैठे थे। उनके दरबारमें उनके मंत्रि भी मौजूद थे। वे राज्य के मामलों पर चर्चा कर रहे थे। तभी उनके द्वारपाल दरबार में प्रवेश किया। उन्होंने राजा को देव दत्त के आगमन के बारे में राजा को सूचित किया। राजा ने उनको दरबार में आने की अनुमति दे दी और देव दत्त ने दरबार में प्रवेश किया।

देवदत्त  ने राजकुमार सिद्धार्थ के खिलाफ शिकायत की। उन्होंने राजा से कहा कि सिद्धार्थ ने उसका हंस ले लिया है।  उन्होंने दावा किया कि हंस उनका था क्योंकि उसने इसे गोली मारी थी। उसने न्याय के लिए राजा से प्रार्थना की

राजा ने सिद्धार्थ को दरबार में बुलाया सिद्धार्थ ने हंस के साथ दरबार  में प्रवेश किया सिद्धार्थ ने राजा को बताया कि उसने इस हंस को बचाया है इस लिये यह मेरा हुआ।

यह एक अजीब मामला था। राजा इसे तय करने में असमर्थ था वह उलझन में था राजा ने अपने मुख्यमंत्री को इस मामले की सुनवाई करने और मामला हल करने का आदेश दिया।                                                                                                                                                                          
मुख्यमंत्री ने सिद्धार्थ को स्टूल पर हंस को रखने के लिये कहा। देवदत्त ने उस हंस को बुलाया।  हंस डर से काँपने लगा और भय से रोया।

अब राजकुमार सिद्धार्थ की बारी थी।  उसने उस हंस को बुलाया तब हंस उड़कर सिद्धार्थ के हाथों में जाकर बैठ गया।  मामला सिद्धार्थ के पक्ष में तय किया गया। और हंस उसे दे दिया गया।

                             इसी लिए कहा गया है कि हमेशा मारने वाले से बड़ा बचाने वाला होता है। 

23/3/17

गोपाल भांड और महाज्ञानी

लगभग 200 साल पहले राजा कृष्ण चंद्र बंगाल के एक हिस्से पर शासन करते थे। उनके अदालत में गोपाल भाण्ड नाम का मशखरा था। हालांकि गोपाल भांड  ने किताबों का अध्ययन नहीं किया था, किन्तु वह बहुत बुद्धिमान व्यक्ति था।
एक बार, एक बहुत ही दक्ष आदमी, महाग्यानी पंडित अदालत में आया। उन्होंने सभी भारतीय भाषाओं में स्पष्ट रूप से और पूरी तरह से बात की। उन्हें दर्शन और धर्म का अच्छा ज्ञान था।
उसने सभी प्रश्नों का बहुत बुद्धिमानी से उत्तर दिया लोग उससे बात करने काबिलियत से आश्चर्यचकित थे।  लेकिन कोई भी उनकी मातृभाषा की पहचान नहीं कर सका।
जब भी उन्होंने उससे पूछा जाता, वह अहंकार से मुस्कुराता और कहता, "वास्तव में जो बुद्धिमान व्यक्ति होगा वह मेरी मातृभाषा को आसानी से जान जायगा।"
राजा कृष्ण चंद्र बहुत परेशान था।  इसलिए उन्होंने इसके के लिए एक इनाम की घोषणा की, जो पंडित की मातृभाषा को बता सकता था।
सभी विद्वानों ने ध्यान से महाज्ञानी की बात सुनी। लेकिन कोई भी उसकी मातृभाषा की पहचान नहीं कर सका "आप पर शर्म आनी चाहिए", राजा ने गुस्से में कहा।  सभी विद्वान चुप थे। गोपाल भांड झटके से खड़ा हो गया। उन्होंने कहा, "महाराज, मुझे मौका दो।" "आप कैसे बता सकते हैं?", राजा ने पूछा "महाराज!" मैं बात नहीं करूंगा वह आपको अपने आप ही बताएंगे, "गोपाल भांड ने जवाब दिया।
अगली सुबह राजा अपने बगीचे में टहल रहा था। गोपाल भांड जल्दी से उनके पास भागा और कहा, "मैंने महाज्ञानि पंडित को बताया है कि आप उसे गुलाब की हार के साथ सम्मान करने जा रहे हैं।" "क्या", राजा ने आश्चर्य से कहा।
कुछ समय बाद में राजा ने महाज्ञानी पंडित को आशा के अनुरूप अपनी ओर आते देखा।  वह रेशमी कपड़ों में था।
गोपाल भांड खुद पेड़ो के पीछे छिप गया। महाज्ञानी जैसे ही पेड़ के पास आए, उन्होंने अपना पैर बाहर कर दिया और पंडित को गिरा दिया। महाज्ञानी पंडित ताजा किचड़ जमीन पर गिर गया। वह उठ कर बैठ गया और अपनी मातृभाषा में गोपाल भांड पर चिल्लाने लगा। गोपाल भांड ने कहा,!"महाराज" अब आप जानते हैं, पंडित की" मातृभाषा क्या है! "
महागनी पंडित उठकर गोपाल भांड से कहा, "बुद्धिमान व्यक्ति, आपने मुझे समझदारी से फँस दिया है" और वह चले गए।

खंडगिरी और उदयगिरी गुफाएँ – इतिहास की पत्थरों पर उकेरी कहानी

     स्थान: भुवनेश्वर, ओडिशा      प्रसिद्धि: प्राचीनजैन गुफाएँ, कलात्मक शिल्पकला, ऐतिहासिक महत्व  परिचय भारत की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक ...